नीता अंबानी ने अपने बच्‍चों को इस तरह सिखाया पैसे की कद्र करना, 5 रुपए ही देती थीं पॉकेट मनी

अपने तीनों बच्‍चों को बचपन से ही पैसों की कद्र करना सिखाया है नीता अंबानी और मुकेश अंबानी ने। आइए जानते हैं कैसे। 

अपने बच्‍चों की परवरिश नीता अंबानी और मुकेश अंबानी ने हमेशा ऐसे की है कि वह 'डाउन टू अर्थ' रहें। इतना ही नहीं आकाश अंबानी, ईशा अंबानी और अनंत अंबानी पैसों की कीमत को समझे 

इस लिए नीता अंबानी और मुकेश अंबानी ने बचपन से ही उन्‍हें एक साधारण परिवार के बच्‍चों की जीवनशैली ही दी। आपको जान कर हैरानी होगी कि नीता अंबानी अपने बच्‍चों को स्‍कूल की कैंटीन में खर्च करने के लिए केवल 5 रुपए ही देती थीं।

वह भी उन्‍हें रोज नहीं बल्कि हर फ्राइडे दिए जाते थे। यही 5 रुपए ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी की पॉकेट मनी हुआ करते थे।

यह बात आपको हैरान कर देगी कि पूरे एशिया में मुकेश अंबानी जितना रिच कोई नहीं है, फिर भी वह अपने बच्‍चों को इतने कम पैसे पॉकेट मनी के रूप में देते थे।

इंटरटेनमेंट वेबसाइट को दिए इंटरव्‍यू में नीता अंबानी ने कहा, ' हम वेल्‍थ और पावर की तुलना एक साथ नहीं कर सकते। पावर को तोड़ा नहीं जा सकता। यह एक जिम्‍मेदारी है। मैनें अपने परिवार, काम, पैशन और अपनी मिडिल क्‍लास वैल्‍यूज से इसे कमाया है। '

एक फनी घटना का जिक्र करते हुए नीता ने यह भी बताया, मैं अपने बच्‍चों को 5 रुपए पॉकेट मनी देती थी। एक दिन अनंत मेरे पास आया और उसने मुझे 10 रुपए देने के लिए कहा। 

गौरतलब है, Hurun Global Rich List 2020 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार मुकेश अंबानी का नेट वर्थ 3,80,700 करोड़ रुपए यानी 67 बिलियन अमेरिकी डॉलर है ।

अगर वर्ष 2019 की बात की जाए तो मुकेश अंबानी हर घंटे 7 करोड़ रुपए कमाते हैं। यह आंकड़ें चौका देने वाले हैं। मगर, इतने अमीर होने के बाद भी अंबानी परिवार बहुत ही डाउन टू अर्थ है।

इसकी झलक उनकी बातों में ही नजर आती है। नीता अंबानी एक लीडिंग इंटरटेनमेंट वेबसाइट को इंटरव्‍यू में बता चुकी हैं, ' मैं और मुकेश बिजनेस के साथ-साथ बच्‍चों के फ्यूचर के बारे में हमेशा ही सोचते हैं।

इसलिए हम दोनों ही बिजनेस में कितना ही बिजी रहते हों मगर बच्‍चों के साथ वक्‍त बिताना नहीं छोड़ते। जब बच्‍चे छोटे थे हम तब से ही ऐसा करते आ रहे हैं।

नीता अंबानी की बेटी ईशा अंबानी भी अपनी मां से काफी प्रभावित नजर आती हैं। एक इंटरव्‍यू में उन्होंने कहा था, ' मेरा जन्‍म 1991 में हुआ था। यह वक्‍त Liberalisation का था।

तब मैंने अपने पिता को दिनरात मेहनत करते हुए देखा था। मगर, वह कितना भी बिजी हों जब हमें उनकी जरूरत होती थी तब वह हमारे पास होते थे। हमें बचपन से ही पैसों की वैल्‍यू करना सिखाया गया है और हम यह आजतक कर रहे हैं।

' ईशा ने यह भी कहा, ' मैं जब अपनी मां को देखती हूं तो वह मुझे पूर्ण नजर आती हैं। एक महिला घर और वर्क लाइफ में कैसे तालमेल बैठा सकती है यह मैंने उन्‍ही से सीखा है।'

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